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सिमेज कॉलेज में आयोजित हुआ “इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स” पर वर्कशॉप्स

सिमेज कॉलेज में आयोजित हुआ “इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स” पर वर्कशॉप्स

आई.आई.टी.-गुवाहाटी के सहयोग से कराया गया आइ०ओ०टी० पर लाइव प्रोजेक्ट   

आई.ओ.टी. के द्वारा, दूर से घर के बल्ब को जलाया-बुझाया, वाटर-मोटर को किया नियंत्रित     

सिमेज कॉलेज में बी.सी.ए. तथा बी.एस.सी.(आई.टी.) के छात्रों के लिए IIT- गुवाहाटी तथा सिमेज कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया गया | इस वर्कशॉप के दौरान छात्रों को आई.ओ.टी (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स) का प्रशिक्षण दिया गया | इस कार्यक्रम को संचालित करने के लिए आई.आई.टी.-गुवाहाटी से ई. गौतम कुमार के नेतृत्व में 6 प्रशिक्षकों का एक दल कॉलेज आया था |  सभी सफल छात्रो को IIT- गुवाहाटी की ओर से सर्टिफिकेट जारी किया जायेगा | साथ ही वर्कशॉप में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रो को IIT- गुवाहाटी में आयोजित “टेकवृद्धि – नेशनल आईटी चैम्पियनशिप” में भाग लेने हेतु आमन्त्रण मिला है |

IOT तकनीक की मांग बढती जा रही है | गूगल, माइक्रोसोफ्ट, फेसबुक और सिस्को जैसी संस्थानों द्वारा इसे भविष्य की टेक्नोलॉजी कहा गया है | IOT का संभावित बाज़ार 80 trillion डॉलर का अनुमानित है | दरअसल जिस तरह वर्तमान इन्टरनेट का प्रयोग सिर्फ लोगों द्वारा किया जाता है, तो यह इन्टरनेट ऑफ़ पब्लिक है वहीँ IOT एक ऐसी व्यवस्था है जिसका प्रयोग वस्तुओ, जानवरों, मकानों, सडको और गाड़ियों द्वारा हमारी सुविधा के लिए किया जायेगा | इस तरह की व्यवस्था के लिए डिवाइस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का होना महत्वपूर्ण है | छात्रों ने एंड्राइड, डिजिटल इलेक्ट्रोनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम, क्लाउड इन्वैरोंमेंट और बिग डाटा के माध्यम से IOT  की प्रणाली को विकसित करने का लाइव प्रोजेक्ट पूरा किया |

इस वर्कशॉप के दौरान सिमेज के छात्रों ने इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के बेसिक और्डीनो, यु.एन.ओ., माइक्रो कंट्रोलर, एल.ई.डी., रनिंग मोटर्स के बारे में तथा अन्य जानकारी हासिल की | इसके उपरांत छात्रों ने सेंसर कि मदद से आई.ओ.टी. के इस्तेमाल से इंटरनेट से बल्ब को जलाना, या बुझाना, किसी (पानी के) मोटर को नियंत्रित करना किसी शॉपिंग मॉल या किसी बड़े हॉल के अन्दर उपस्थित लोगों की गिनती करना, वाटर टैंक के पानी के लेवल के अनुसार खुद-ब-खुद वाटर मोटर को स्टार्ट या स्टॉप करना सीखा तथा अन्य बहुत से कार्यों को सम्पादित किया |

निकट भविष्य में निर्मित होने वाले ‘स्मार्ट होम्स’ और “स्मार्ट सिटी” के कॉन्सेप्ट को धरातल पर यथार्थ में उतारने के लिए आई.ओ.टी. की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है | इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स एक ऐसी नेटवर्किंग है जिसमे आपके उपयोग की सभी चीज़ें, वाशिंग मशीन से लेकर से आपके घडी, इलेक्ट्रिक डिवाइस या जुते तक इन्टरनेट से जुड जाते है और डिवाइस या एप के माध्यम से, आप इन्टरनेट का प्रयोग करते हुए वस्तुओ को इच्छानुसार संचालित कर सकते हैं | इसके माध्यम से अगर आप ऑफिस में भी हों तो अपने घर के दरवाज़े को गेस्ट के आने पर खोल या बंद कर सकते हैं | या किचन में रखे अवन को या घर में रखे वाशिंग मशीन को ऑन-ऑफ़ किया जा सकता है | यदि गाड़ियों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाये तो ट्रैफिक सिग्नल से इसे जोड़ कर नियंत्रित किया जा सकता है | इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स तकनीक का इस्तेमाल घडी, जूते या दैनिक इस्तेमाल के अन्य वस्तुओं में कर के विभिन्न शारीरिक गतिविधियों को मापा (रीडिंग) जा सकता है | वियरेवल डिवाइस के माध्यम से मरीज की ह्रदय गति, रक्तचाप इत्यादि को सतत तौर पर मापा जा सकता है और एक सामान्य से स्मार्टफोन की मदद से डेटा को हॉस्पिटल या अन्य सहायता केंद्र पर भेजा जा सकता है | यदि इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स को किसी वियरेवल डिवाइस के माध्यम से शरीर से जोड़ा जाये तो मरीज की स्थिति की लाइव मोनिटरिंग की जा सकती है | लाइव मोनिटरिंग की वजह से मरीज को रूटीन चेकअप के लिए बार-बार हॉस्पिटल जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी | इससे जहाँ मरीज को आराम मिलेगा है वही उसके पैसे की भी बचत होगी | साथ ही, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के माध्यम से इमरजेंसी में स्वतः ही विभिन्न सुविधाओं, जैसे इमरजेंसी मैसेजिंग सर्विस इत्यादि को एक्टिवेट किया जा सकता हैं |

इस वर्कशॉप कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सिमेज के निदेशक नीरज अग्रवाल ने कहा कि ‘कॉलेज द्वारा रेग्युलर पढाई के साथ-साथ समय-समय पर विभिन्न ज़रूरी वर्कशॉप्स का आयोजन भी कराया जाता है ताकि छात्र हमेशा अध्यतन नॉलेज से लैस रहें | यही वजह हैं कि कॉलेज में आई.टी. के छात्रों के लिए आई.ओ.टी. जैसे महत्वपूर्ण विषय पर वर्कशॉप आयोजित कराया गया | इस अवसर पर छात्रों ने आई.ओ.टी. में अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया और आई.ओ.टी. के माध्यम से, इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को दूर से नियंत्रित कर अपनी दक्षता का प्रदर्शन भी किया | छात्रों के प्रदर्शन पर सिमेज की सेंटर हेड मेघा अग्रवाल, डीन नीरज पोद्दार तथा सभी शिक्षकों ने प्रसन्नता जाहिर की |