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कृषि प्रबंधन की आधुनिक तकनीक से बिहार को समृद्ध करेंगे सिमेज के छात्र | औद्योगिक भ्रमण एवं विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्रो ने लिया भाग

कृषि प्रबंधन की आधुनिक तकनीक से बिहार को समृद्ध करेंगे सिमेज के छात्र | औद्योगिक भ्रमण एवं विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्रो ने लिया भाग

सिमेज के छात्रों ने ‘बिहार में कृषि’ आधारित उद्योगों के विस्तार एवं उत्पादन प्रक्रिया के उन्नयन हेतु’ बनाये गए प्रोजेक्ट को, ‘जैन समूह’ द्वारा स्थापित ‘हाईटेक एग्री बिजनेस मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ द्वारा चयनित किया गया एवं सिमेज के छात्रों को दो दिवसीय  ‘इंडस्ट्रियल टूर’ सह ‘शैक्षिक भ्रमण’ पर जलगाँव-महाराष्ट्र आने का निमंत्रण दिया गया | सिमेज से 4 शिक्षको के साथ कुल 32 छात्रों का समूह जलगाँव दौरे पर गया, जिनमे 15 छात्राएं तथा 17 छात्र शामिल थे | इनका नेतृत्व सिमेज के निदेशक नीरज अग्रवाल, सेंटर हेड मेघा अग्रवाल तथा डीन नीरज पोद्दार ने किया | इस दल ने आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (माइक्रो इरिगेशन सिस्टम) तथा ‘ड्रिप इरिगेशन सिस्टम’ के लाईव डेमो एवं ट्रेनिंग प्राप्त की

छात्रों ने कई पौधों यथा केला, अनार, आम, गन्ना, सेब, प्याज तथा अन्य फसलों की अधिक पैदावार देने वाली नयी प्रजातियों के बारे में जानकारी प्राप्त की | उन्होंने टिश्यु कल्चर, मल्टीग्राफ्टिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को देखा और समझा | साथ ही उन्होंने एडवांस बायोटेक रिसर्च एंड डेवलपमेंट एवं टिश्यु कल्चर लैब का भ्रमण भी किया | छात्रों ने वहां के वरीय कृषि वैज्ञानिको से बिहार के परिपेक्ष्य में विभिन्न पैदावारों को बढ़ाने एवं फसलों को उन्नत बनाने के बारे में जानकारी प्राप्त की | सिमेज के छात्रों ने ड्रिप इरिगेशन तकनीक द्वारा कम पानी से साथ वैज्ञानिक पद्धति  से कैसे सिंचाई की जाये, इसके बारे में भी जानकारी हासिल की | साथ ही छात्रों ने कम ऊंचाई वाले (बोन्साई) वृक्षों  से अधिक पैदावार प्राप्त करने एवं एवं छोटे फसल चक्रो को हासिल करने की क्रिया विधि को भी समझा ताकि उपस्थित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए, कृषको की  आमदनी में वृद्धि हो सके |

साथ ही छात्रों द्वारा बिहार में उपजने वाले आम, लीची, केला, गन्ना, प्याज तथा हरी सब्जी एवं धान के परिपेक्ष्य में उचित सिंचाई प्रणाली पर भी चर्चा की गयी | छात्रों ने ग्रीन हॉउस तकनीक के माध्यम से विभिन्न फसलों को सभी ऋतुओं में प्राप्त करने की विधी को समझा | साथ ही जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशकों के उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त की | छात्रो ने बिना मिटटी के होने वाली खेती की पध्धति को भी देख कर समझा |

छात्रों ने केवल, अधिक से अधिक फसल को प्राप्त करना ही नहीं बल्कि उद्योग की माँग के अनुसार खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में, विभिन्न प्रकार की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की | इस सन्दर्भ में छात्रों ने जैन समूह द्वारा संचालित विश्व के सबसे बड़े बनाना एवं मैंगो पल्प फैक्ट्री का भी भ्रमण किया | यहाँ आम, केला, अमरुद एवं अनार को प्रशंश्करित कर विश्व के कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों यथा कोका-कोला, पेप्सी, एवं नेस्ले आदि को मैंगो पल्प तथा बनाना पल्प (प्यूरी) के रूप में निर्यात किया जाता है | छात्रो ने उत्पादन प्रक्रिया के साथ साथ मार्केटिंग, एक्सपोर्ट एवं अन्य स्ट्रेटेजीज़ की जानकारी भी प्राप्त की |

इसके साथ ही छात्रों ने प्याज, टमाटर एवं ग्रीन वेजिटेबल के डीहाईड्रेशन प्लांट का भी भ्रमण किया, जहाँ प्याज, टमाटर एवं विभिन्न वेजिटेबल्स को प्रोसेस कर, पाउडर में परिवर्तित किया जाता है | छात्रों ने, लीची, आम, प्याज, टमाटर, केला, पपीता आदि के फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिटों की बिहार में भारी संभावनाओं को देखते हुए, इनके उपयोग को बारीकी से समझा | छात्रों ने इसके एक्सपोर्ट के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की | साथ ही, प्रोसेस्ड फ़ूड के खाड़ी के देशों, यूरोपियन कंट्रीज़, अमरीका एवं अफ्रीका इत्यादि देशों में मांग के वेरिएशन को समझा, साथ ही, इससे जुडी मार्केटिंग स्ट्रेटजी एवं चुनातियों के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र की |

इसके पश्चात, छात्रों ने ‘निलॉन्स समूह’ द्वारा स्थापित एशिया के सबसे बड़े, ‘पपाया कैंडी’ (टूटी फ्रूटी) प्लांट, आचार, वर्मिसेल तथा इंस्टेंट फ़ूड प्लांट का भी भ्रमण किया |

इसके साथ ही छात्रों ने, जैन समूह द्वारा स्थापित, भारत के सबसे बड़े प्लास्टिक फैक्ट्री ‘‘प्लास्टिक सिटी’ का भी भ्रमण किया, जहाँ 1.5 एम०एम० से लेकर 1600 एम०एम० के ‘अंडर-सी-केबल हॉउस’ पाइपस का निर्माण किया जाता है |

छात्रों ने ‘वुड कंजर्वेशन’ हेतु इस्तेमाल किये जाने वाले ‘एक्सेल बोर्ड’ के प्लांट का भी दौरा किया | यहाँ लकड़ी के विकल्प के रूप में प्लास्टिक के दरवाजा, खिड़की एवं पैनल्स का निर्माण होता है |  अभी सौ प्रतिशत उत्पाद का  अमेरिका, यूरोप एवं खाड़ी के देशो को निर्यात किया जाता है |

छात्रो ने शत प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से निर्मित भारत के पहले सोलर प्लांट का भी दौरा किया | जहाँ सोलर तकनीक पर आधारित सभी उपकरणों जैसे सोलर वाटर हीटर, सोलर वाटर पम्प एवं सोलर पॉवर प्लांट का उत्पादन  किया जाता है | इसके माध्यम से सोलर उर्जा आधारित विभिन्न उपकरणों से खेती में छोटे बड़े स्तरों पर सोलर उर्जा का इस्तेमाल कर, बिजली की किल्लत तथा बिजली पर निर्भरता से बचा जा सकता है | साथ ही, निजी तथा सरकारी भवनों में भी सोलर पैनल्स को लगाकर बिजली का उत्पादन किया जा सकता है |

कचड़ा प्रबंधन की समस्या से निपटने के लिए, ‘वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट्’ का भी भ्रमण किया गया | यहाँ विभिन्न प्रकार के घरेलु एवं औधोगिक वेस्ट के माध्यम से 1600 मेगावाट बिजली तथा जैविक खाद का उत्पादन किया जाता है | साथ ही छात्रों ने वृहत स्तर पर पुरे शहर के अपशिष्ट पदार्थो का प्रशंश्कर्ण करने वाले बड़े बायो गैस प्लांट का भी भ्रमण किया एवं पटना जैसे शहर में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की |

छात्रों ने ‘गाँधी रिसर्च फाउंडेशन’ द्वारा स्थापित, ‘गांधी तीर्थ’ का भी भ्रमण किया, जो गाँधी के जीवन पर आधारित विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय है | यहाँ छात्रों ने गाँधी जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए अपने चरित्र निर्माण, राज्य की प्रगति में अपना सक्रिय योगदान एवं बेहतर राष्ट्र के निर्माण हेतु शपथ ली |